यह फिल्म एक निडर और उजागर करने वाली कहानी है जो समाज की गहरी सोच और मान्यताओं पर सवाल खड़ा करती है। इसमें एक डॉक्टर की जिंदगी के धुंधलके और उस पर लगे आरोपों की जटिलता को दिखाया गया है, जहां न्याय से पहले ही समाज अपने फैसले सुना देता है। मुख्य भूमिका में कोंकणा सेन शर्मा का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिलेगा। यह फिल्म समाज की त्वचा में छुपे हुए उन पूर्वाग्रहों को उजागर करती है जो अक्सर न्याय के फैसले को प्रभावित कर देते हैं। इसकी कहानी न केवल विचारोत्तेजक है, बल्कि यह दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है कि न्याय और समाज के बीच का रिश्ता कितना जटिल हो सकता है। फिल्म का निर्देशन प्रभावशाली है, जिसने टुजी और संवेदनशीलता का सकुशल मिश्रण किया है। इसकी कहानी समाज के कलंक और पूर्वाग्रहों की गहराई में जाकर हमें अंधकारमय सच्चाइयों से रूबरू कराती है। यह फिल्म सामाजिक मुद्दों पर बड़ा बयान है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है कि न्याय और समाज की भूमिका कितनी जटिल हैं। एक बेहतरीन अभिनय और संवेदनशील निर्देशन के साथ, यह फिल्म आपको अपनी सोच को फिर से परखने पर मजबूर कर देगी।